Vedant Samachar

राष्ट्रीय पेसा दिवस पर जिले की सभी ग्राम पंचायतों में आज विशेष ग्रामसभा, पेसा अधिनियम और विकसित भारत जी-राम-जी योजना पर होगी चर्चा

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कोरबा। राष्ट्रीय पेसा दिवस के अवसर पर 24 दिसंबर (बुधवार) को कोरबा जिले की समस्त ग्राम पंचायतों में विशेष ग्रामसभाओं का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में कलेक्टर कुणाल दुदावत द्वारा आदेश जारी किए गए हैं। कोरबा जिला पेसा अधिसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आने के कारण इन विशेष ग्रामसभाओं में पेसा अधिनियम के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी ग्रामीणों को दी जाएगी, ताकि आदिवासी एवं ग्रामीण समुदाय अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों से भली-भांति अवगत हो सकें।

विशेष ग्रामसभाओं में केंद्र एवं राज्य शासन की नवीन और महत्वाकांक्षी योजना “विकसित भारत जी-राम-जी (विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण) अधिनियम, 2025” के प्रमुख प्रावधानों तथा इसकी समेकित कार्ययोजना की जानकारी भी ग्रामीणों को दी जाएगी। यह अधिनियम राष्ट्रीय विजन के अनुरूप समृद्ध, आत्मनिर्भर और सशक्त ग्रामीण भारत के निर्माण के उद्देश्य से लागू किया गया है।

अधिनियम के तहत अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी-आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी। पूर्व में निर्धारित 100 दिनों के स्थान पर अब 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किए जाने से ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी और उनकी आजीविका सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।

जी-राम-जी अधिनियम के अंतर्गत किए जाने वाले सभी कार्य राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना का हिस्सा होंगे। इनमें जल सुरक्षा से जुड़े कार्य, मूलभूत ढांचे का विकास, आजीविका आधारित अवसंरचनाएं तथा जलवायु परिवर्तन और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों से बचाव से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे गांवों में टिकाऊ विकास को बढ़ावा मिलेगा।

अधिनियम के तहत तकनीक आधारित कार्ययोजना पर विशेष जोर दिया गया है। ग्राम पंचायत स्तर पर विकसित पंचायत की परिकल्पना के अनुसार योजनाएं तैयार की जाएंगी, जिन्हें पीएम गतिशक्ति और राष्ट्रीय स्थानिक योजना प्रणालियों से जोड़ा जाएगा। पंचायतों की भौगोलिक स्थिति, नगरीकरण की दिशा और स्थानीय विकास आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का निर्माण किया जाएगा।

खेती के मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों और कृषि श्रमिकों की जरूरतों को संतुलित करने के लिए राज्यों को एक वित्तीय वर्ष में 60 दिनों की अवधि अधिसूचित करने की छूट दी गई है। इससे बुवाई और कटाई के व्यस्त समय में कृषि कार्यों के लिए पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध रह सकेंगे।

यदि किसी ग्रामीण परिवार को कार्य की मांग करने के बाद निर्धारित समय-सीमा में रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो राज्य सरकार द्वारा बेरोजगारी भत्ता प्रदान किए जाने का प्रावधान भी अधिनियम में किया गया है, जिससे श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।

जी-राम-जी अधिनियम के तहत पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाया गया है। ग्राम पंचायत को प्राथमिक कार्यान्वयन इकाई के रूप में स्थापित किया गया है। श्रमिकों का पंजीकरण, रोजगार कार्ड जारी करना तथा कम से कम 50 प्रतिशत कार्यों का निष्पादन ग्राम पंचायतों द्वारा किया जाएगा। ग्रामसभाएं नियमित रूप से सामाजिक अंकेक्षण करेंगी, जबकि जनपद और जिला पंचायतें योजना के समेकन, पर्यवेक्षण और निगरानी की जिम्मेदारी निभाएंगी।

जिला पंचायत कोरबा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिनेश कुमार नाग ने बताया कि अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण, स्पेसेटियल टेक्नोलॉजी आधारित योजना निर्माण, मोबाइल डैशबोर्ड के माध्यम से निगरानी और साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण जैसी आधुनिक तकनीकी व्यवस्थाएं अपनाई जा रही हैं। इसके साथ ही सामाजिक अंकेक्षण तंत्र को और अधिक मजबूत किया जा रहा है, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

विशेष ग्रामसभाओं के माध्यम से ग्रामीणों को पेसा अधिनियम और विकसित भारत जी-राम-जी अधिनियम की विस्तृत जानकारी देकर उन्हें योजनाओं से जोड़ने और गांवों के समग्र विकास की दिशा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा।

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