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KORBA NEWS : गेवरा खदान में भूविस्थापितों का उग्र आंदोलन, 4 घंटे ठप रहा कोयला उत्पादन…

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रोजगार व पुनर्वास की मांग को लेकर एसईसीएल गेवरा मुख्यालय का घेराव, प्रबंधन ने दिया लिखित आश्वासन

कोरबा ,16 दिसंबर (वेदांत समाचार)। एसईसीएल के कुसमुंडा, गेवरा, दीपका एवं कोरबा क्षेत्र के प्रभावित गांवों के भूविस्थापितों ने छत्तीसगढ़ किसान सभा एवं भूविस्थापित रोजगार एकता संघ के नेतृत्व में बुधवार को उग्र आंदोलन किया। अर्जन के बाद जन्म, छोटे खातेदारों को रोजगार, लंबित प्रकरणों के निराकरण एवं आउटसोर्सिंग कार्यों में प्रभावितों को 100 प्रतिशत रोजगार देने की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों ने गेवरा खदान में तीन स्थानों पर कोयला उत्पादन बंद कर दिया और रैली निकालकर एसईसीएल गेवरा मुख्यालय के दोनों मुख्य द्वारों का घेराव किया।

सुबह से शुरू हुआ यह आंदोलन करीब चार घंटे तक चला, जिससे खदान का कार्य पूरी तरह प्रभावित रहा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर ठोस पहल नहीं की गई तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मुख्य द्वारों पर बेरिकेटिंग की गई।

आंदोलन के बाद एसईसीएल प्रबंधन ने बिलासपुर मुख्यालय में बैठक आयोजित कर समस्याओं के समाधान का लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त किया गया। आंदोलन का नेतृत्व जवाहर सिंह कंवर एवं दीपक साहू ने किया।

छत्तीसगढ़ किसान सभा ने स्पष्ट किया कि यदि आश्वासन के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई तो 30 दिसंबर को कुसमुंडा क्षेत्र में पुनः खदान बंद आंदोलन किया जाएगा। इस संबंध में पूर्व में ही अधिकारियों को आंदोलन की सूचना दी जा चुकी है।

किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि जिन किसानों की जमीन एसईसीएल द्वारा अधिग्रहित की गई है, उन सभी खातेदारों को स्थायी रोजगार देना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। विकास परियोजनाओं के नाम पर विस्थापित किए गए गरीब परिवार आज भी रोजगार और पुनर्वास के लिए भटक रहे हैं। यदि गुमराह करने का प्रयास जारी रहा तो आंदोलन और उग्र होगा।

किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू ने आरोप लगाया कि एसईसीएल पुराने लंबित रोजगार मामलों को लेकर गंभीर नहीं है। छोटे-बड़े खातेदारों के नाम पर किसानों को बांटकर एकता तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि छोटे खातेदारों को रोजगार से वंचित रखा गया है।

भूविस्थापित रोजगार एकता संघ के दामोदर श्याम, रेशम यादव और सुमेंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष 1978 से 2004 के बीच कोयला खनन के लिए जमीन अधिग्रहित की गई, लेकिन आज तक सैकड़ों प्रभावित परिवारों को न रोजगार मिला और न ही समुचित पुनर्वास।

घेराव एवं खदान बंद आंदोलन में जनपद सदस्य नेहा तंवर, दिग्विजय, पुनी राम, विजय, शरद, बग्गू सिंह, त्रिवेंद्र, सूरज, सरपंच रलिया विष्णु सिंह बिंझवार, पूर्व सरपंच बेबी सिंह तंवर सहित बड़ी संख्या में चारों क्षेत्रों के भूविस्थापित महिला-पुरुष शामिल रहे।

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