कोरबा, 16 दिसंबर (वेदांत समाचार)। मानवता, सेवा और परोपकार के प्रतीक चौधरी मित्रसेन आर्य की 94वीं जयंती के अवसर पर दीपका स्थित इंडस पब्लिक स्कूल में विशेष प्रातःकालीन सभा, पूजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। पूरे विद्यालय परिसर में वैदिक मंत्रोच्चारण, आध्यात्मिक गीतों और मनभावन प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण व्याप्त रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः प्रार्थना और स्तुति से हुई, जिसके पश्चात वैदिक मंत्रों के बीच चौधरी मित्रसेन आर्य के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर पूजन किया गया। विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं, विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन कक्षा दसवीं की छात्रा पायल सहारन ने किया, जबकि कक्षा नौवीं के विद्यार्थियों ने सुसंगठित और प्रेरक प्रातःकालीन सभा प्रस्तुत की।
हिंदी विभागाध्यक्ष हेमलाल श्रीवास ने चौधरी मित्रसेन आर्य के जीवन की प्रेरक घटनाओं पर प्रकाश डालते हुए ओजस्वी कविता के माध्यम से विद्यार्थियों में उत्साह और आदर्शों के प्रति जागरूकता का संचार किया। संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. योगेश शुक्ला के वैदिक मंत्रोच्चारण से पूरा विद्यालय परिसर आध्यात्मिकता से सराबोर हो गया। पूजन के दौरान निरंतर मंत्र-जाप से वातावरण और अधिक पवित्र हो उठा।

कार्यक्रम में चौधरी मित्रसेन आर्य के जीवन पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने उनके संघर्ष, साधना और सफलता को प्रभावशाली ढंग से मंचित किया। साथ ही पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से उनकी जीवनी, सामाजिक योगदान और उपलब्धियों से विद्यार्थियों को अवगत कराया गया। कक्षा छठवीं से नवमीं तक के विद्यार्थियों के लिए प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक एवं शैक्षणिक प्रभारी सब्यसाची सरकार ने कहा कि चौधरी मित्रसेन आर्य भले ही आज हमारे बीच भौतिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, कार्य और दृष्टि युगों-युगों तक भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। उन्होंने बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और समाज कल्याण के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए, जो आज भी प्रासंगिक हैं।
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय गुप्ता ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि दुनिया में विरले ही ऐसे महापुरुष होते हैं जो अपने सत्कर्मों के पदचिन्ह छोड़ जाते हैं। चौधरी मित्रसेन आर्य का जीवन सत्य, संयम और सेवा का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि महानता पद या वैभव से नहीं, बल्कि कर्म, विनम्रता और मानव सेवा से पहचानी जाती है। चौधरी मित्रसेन आर्य का प्रत्येक कार्य समाज और मानवता के लिए समर्पित रहा, इसलिए उनका जीवन आज की पीढ़ी के लिए अनुकरणीय है।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि एक सफल और समृद्ध व्यक्ति होने के बावजूद चौधरी मित्रसेन आर्य सदैव विनम्र, मृदुल और सेवा भाव से परिपूर्ण रहे। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर यदि युवा पीढ़ी मानवता, सेवा और सकारात्मकता को अपनाए, तो समाज और राष्ट्र निश्चित ही प्रगति के पथ पर अग्रसर होगा।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों का विशेष योगदान रहा। चौधरी मित्रसेन आर्य की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल श्रद्धांजलि था, बल्कि उनके आदर्शों को आत्मसात करने का प्रेरक संदेश भी।



