कोरबा,06नवंबर (वेदांत समाचार) । सिखों के पहले गुरु और सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी का 556वां प्रकाश पर्व आज कुसमुंडा गुरुद्वारा सिंह सभा में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारा परिसर को आकर्षक ढंग से फूलों, रोशनी और गुब्बारों से सजाया गया था। चारों ओर गूंजते शबद कीर्तन और भक्ति संगीत ने वातावरण को पूर्णतः धार्मिक उल्लास से भर दिया।
प्रकाश पर्व के अवसर पर गुरुद्वारा सिंह सभा में विशेष कीर्तन दरबार और अरदास का आयोजन किया गया। जत्थों ने गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं पर आधारित मधुर कीर्तन प्रस्तुत किए और श्रद्धालुओं को प्रेम, समानता और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता गुरुद्वारे में लगा रहा, जहां सभी ने नतमस्तक होकर मत्था टेका और आशीर्वाद प्राप्त किया।
गुरुद्वारा सिंह सभा के सुरजीत सिंह हैप्पी ने बताया कि गुरु नानक देव जी सिख धर्म के प्रवर्तक और पहले गुरु थे। उन्होंने अपने जीवन में समानता, प्रेम, विनम्रता और निस्वार्थ सेवा का संदेश दिया। उन्होंने सिखाया कि इंसान को धर्म या जाति से ऊपर उठकर इंसानियत के आधार पर एक-दूसरे से प्रेम करना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि गुरु नानक देव जी के उपदेश — “नाम जपो, कीरत करो और वंड छको” — आज भी सिख समाज और संपूर्ण मानवता के लिए जीवन मार्गदर्शक बने हुए हैं। गुरु जी की शिक्षाएं सत्य, एकता और भक्ति की प्रेरणा देती हैं।
प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में गुरुद्वारे में विशेष लंगर का आयोजन भी किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन में भक्ति, सौहार्द और सेवा की भावना देखने को मिली।



