जल जीवन मिशन के बावजूद जिले के स्कूल प्यासे, 5 साल में नहीं मिला एक भी नल कनेक्शन

कोरबा, 02अप्रैल (वेदांत समाचार)। जिले में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत घर-घर नल कनेक्शन देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि बीते 5 वर्षों में जिले के किसी भी शासकीय स्कूल को इस योजना के तहत पेयजल के लिए नल कनेक्शन नहीं मिल सका है। इसके चलते स्कूली बच्चों की प्यास आज भी हैंडपंप के भरोसे ही बुझ रही है।

स्थिति यह है कि पंचायतों द्वारा 15वें वित्त आयोग की राशि से लगाए गए हैंडपंप ही स्कूलों में पानी का एकमात्र साधन बने हुए हैं। स्वयं संबंधित विभाग के अधिकारी भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं। जल जीवन मिशन के तहत जिले के 712 ग्रामों में ओवरहेड टैंक निर्माण और घर-घर नल कनेक्शन देने का कार्य जारी है। स्थानीय प्रशासन द्वारा स्कूलों को भी इस योजना से जोड़ने के मौखिक निर्देश दिए गए थे, लेकिन गाइडलाइन में स्पष्ट उल्लेख न होने के कारण पीएचई विभाग ने इस दिशा में कोई कार्य नहीं किया।

इसका परिणाम यह है कि प्राथमिक से लेकर हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल तक, किसी भी स्तर पर नल कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराया गया। दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में हालात और भी गंभीर हैं, जहां हैंडपंप खराब होने पर उसे सुधारने में महीनों लग जाते हैं। इस दौरान छात्रों को आसपास के घरों या सार्वजनिक कुओं से पानी लाकर अपनी प्यास बुझानी पड़ती है।

जिले में कुल 1920 शासकीय स्कूल संचालित हैं। इनमें से लगभग 200 स्कूल शहरी और उपनगरीय क्षेत्रों में हैं, जहां जल आवर्धन योजना या औद्योगिक संस्थानों द्वारा पानी की आपूर्ति की जा रही है। लेकिन शेष करीब 1500 ग्रामीण स्कूल पूरी तरह पंचायतों के भरोसे हैं, जहां पेयजल की व्यवस्था स्थायी नहीं है।

गर्मी की शुरुआत के साथ ही जिले के 34 स्कूलों के हैंडपंप खराब हो चुके हैं। स्कूल प्रबंधन ने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर सुधार की मांग की है, लेकिन नए शिक्षण सत्र की शुरुआत के बावजूद इन हैंडपंपों की मरम्मत नहीं हो सकी है। ऐसे में इन स्कूलों के विद्यार्थियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है।

पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता रमन उरांव के अनुसार, “जल जीवन मिशन की गाइडलाइन में स्कूलों को नल कनेक्शन देने का उल्लेख नहीं है, इसलिए कनेक्शन नहीं दिया गया। पंचायतों को अपने 15वें वित्त से यह व्यवस्था करनी है।”

वहीं जिला शिक्षा अधिकारी टी.पी. उपाध्याय ने भी पुष्टि करते हुए कहा, “जिले के किसी भी स्कूल को जल जीवन मिशन के तहत नल कनेक्शन नहीं मिला है। फिलहाल हैंडपंप के माध्यम से ही पानी की व्यवस्था की जा रही है।”

सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद स्कूलों तक पेयजल सुविधा नहीं पहुंच पाना कई सवाल खड़े करता है। विशेष रूप से तब, जब यह योजना “हर घर जल” के उद्देश्य से चलाई जा रही है, लेकिन बच्चों के स्कूल ही इससे वंचित हैं।

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